सावित्रीबाई फुले

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Date

2026

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Publisher

Rachnakar Publishing House, New Delhi

Abstract

प्राचीन काल में नारी का स्थान समाज में महत्वपूर्ण और सम्मानित था। उन्हें शिक्षित करने पर महत्व दिया गया और कई भारतीय नारी विदुषी मानी जाती थी। अनेक कवियों और लेखकों ने नारी के गुना और शक्तियों का वर्णन किया ,उदाहरण के लिए सावित्री दमयंती और गार्गी जैसे पात्रों ने अपने ज्ञान और साहस से समाज में पहचान बनाई । ऋग्वेद और उपनिषदों ने ज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाई। महिलाएं वेदों और शास्त्रों का अध्ययन करती थी और समाज में सम्मानित स्थान प्राप्त करती थी मध्यकालीन भारत में स्त्री शिक्षा की स्थिति कमजोर होती गई ,और विदेशी आक्रमणों पितृ सत्तात्मक विचारधारा और धार्मिक कट्टरता के कारण महिलाओं की शिक्षा पर पाबंदियां लगा दी गई। इस समय महिलाओं को घरेलू कार्यों तक ही सीमित कर दिया गया और उनकी शिक्षा को अनदेखा किया गया। पर्दा प्रथा, सती प्रथा जैसी कुरीतियों के कारण महिलाएं समाज में और भी हाशिये पर चली गई ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आधुनिक शिक्षा का आरंभ हुआ और इस समय कुछ समाज सुधारक महिलाओं की शिक्षा के लिए आवास उठने लगे। इनमें राजा राममोहन राय ईश्वर चंद्र विद्यासागर ज्योति राव फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे प्रमुख नाम शामिल है । सावित्रीबाई फुले उसे समय भारतीय समाज की पहली महिला शिक्षक और समाज सुधारक थी उनका जीवन केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं थी बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति की कहानी थी। जिसने भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित किया उनका योगदान न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए भी अविस्मरणीय है।

Description

Book Title: आधुनिक भारत के महान विचारक Book Author(s)/Editor(s): Dr. Amit Kumar, Dr. Awadh Bihari Lal, Dr. Shrutkirti Rastogi

Keywords

शिक्षा, नारी शिक्षा

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